क्यों हो रही है निर्भया के दोषियों को फांसी से बचाने की कोशिश

जैसे 90 के दशक में होता था की विलेन बचने की कोशिश करता था और उसके वकील किसी भी हद तक जाने को तैयार हो जाते थे और अंत तक केस लड़ते थे लेकिन उसको अंत में हारना ही पड़ता था और सजा काटनी पड़ती थी आपने ऐसी ढेर सारी फिल्में देखी होंगी जिसका ज़िक्र हम आपके सामने करेंगे निर्भया दोषियों की फांसी की तारीख तय हो चुकी थी लेकिन निरस्त हुई अब फिर तय हो गई है लेकिन देखना यह है कि इस बार फांसी होती है या निर्भया के दोषियों के वकील कोई नई दलील पेश करने जा रहे हैं निर्भया के दोषी के वकील अलग-अलग तरीके अपना रहे हैं उन्हें फांसी से बचाने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं राष्ट्रपति को याचिका भी दायर की है और फांसी ना देने की मांग भी की है उन्होंने कई मुद्दे भी रखे कि कई बार फांसी दी गई है और वो बेकसूर साबित हुए हैं इस मुद्दे को उन्होंने रखा लेकिन जरा सोचिए कि बलात्कारी को बचाना क्या सही होगा अभी कुछ दिन पहले जब एक डॉक्टर का सड़क पर बलात्कार हुआ था और उसको जिंदा जला दिया था तब आरोपी को सरेआम गोली मार दी गई थी यानी फैसला ऑन द स्पॉट और उस मामले को पूरी तरीके से दबा दिया गया तब पूरा देश इस मौत पर वाहवाही कर रहा था और जमकर पुलिस वालों की तारीफ हो रही थी कि फैसला सही किया

आपको बता दें कि निर्भया के दोषियों की फांसी का ट्रायल भी हो चुका है और फांसी देने की तारीख भी तय हो चुकी है इस बार फांसी होकर ही रहेगी पिछली बार तो यह सुनने में आया था कि वहां जल्लाद नहीं है जल्लाद कोई फांसी देने को राजी नहीं है और जो जल्लाद फांसी देते थे उनकी पगार नहीं मिली है और कितनी पगार मिलती है वह हमने एक जल्ला से बात की तब हमें पता चला दरअसल एक जल्लाद को एक फांसी पर ₹3500 आते हैं और यह सरकार द्वारा आते हैं

लेकिन अब ट्रायल भी हो चुका है और जल्लाद भी है और तारीख भी तय है अब देखना यह है कि निर्भया के दोषियों को फांसी होती है या कोई बचने की तरकीब उनके वकील खोज कर डेट को आगे बढ़ा लेंगे या सजा बदलवा लेंगे या इस सजा से बच निकलेंगे जैसे हमने आपको बताया था कि नब्बे के दशक में बॉलीवुड की फिल्मों में जो होता था