क्या घोड़ा खाए क्या खाए मालिक

भारत में लॉक डाउन से शादियां ज्यादातर कैंसिल हो रही हैं लोग शादी कर भी रहे हैं तो बारातियो में सिर्फ कम आदमी ले जाकर शादियां की जा रही हैं वहीं इस लॉक डाउन से शादियों में घोड़ी नचाने वाले लोगों का काम पूरी तरीके से ठप हो गया है इन लोगों ने शुरुआत के सीजन में घोड़े और घोड़ियां खरीदी थी यह सोचकर कि इस सीजन में अच्छा धन कमाएंगे लेकिन लॉक डाउन की वजह से पूरा सीजन ब्लॉक हो गया। दूल्हे के सवार वाले घोड़े की न्यूनतम कीमत 1 लाख से 2 लाख की होती है एक घोड़ी पर दो लड़के काम करते हैं जिनकी पगार भी घोड़ी मालिक को देनी होती है जिसमें से शादियों में जब घोड़ी जाती है तब इन लड़कों को कुछ इनाम भी मिल जाता है और एक शादी के लगभग 4 से 5 हज़ार की कमाई हो जाती है।

आगरा के रहने वाले सलीम ने बताया कि उन्होंने सीजन की शुरूआत में 1 जोड़ी घोड़ा घोड़ी खरीदी यह सोच कर कि सीजन निकलेगा तो अच्छी कमाई की जाएगी उनका परिवार भी दूल्हे की घुड़सवारी में चलता है उनके जैसे और भी 200 परिवार और हैं जो उन सवारी का काम करते हैं। लॉक डाउन की वजह से उनकी सारी बुकिंग कैंसिल हो गई और उनका काम पूरी तरीके से ब्लॉक हो गया खाना-पीना उनका भी मुश्किल हो रहा है और साथ में घोड़ों को भी चलाना मुश्किल हो रहा है एक घोड़े पर 200 से 250 रुपये तक का खर्च आता है ऐसे में क्या बे अपने गुणों को खिलाएं क्या खुद खाएं क्योंकि उनका काम कोरोनावायरस महामारी की वजह से पूरा चौपट हो गया है ।

नागपुर के रहने वाले सलीम ने बताया कि उन्होंने इस बार दो घोड़े कर्ज करके यह सोच कर लिए थे कि सीजन अच्छा निकल जाएगा तो पैसा अदा कर देंगे सलीम का परिवार भी इसी से गुजारा करता है और वे इसे पारिवारिक काम मानते हैं और उन्होंने बताया कि इस काम के अलावा उन्हें कोई काम आता भी नहीं है उन्होंने बचपन से घोड़ा नचाने का काम किया है शादियों मे दूल्हे के लिए घुड़सवारी के लिए घोड़ा किराए पर दिया जाता है जिससे उन्हें एक अच्छी खासी कीमत मिलती है जिनसे उनका परिवार चलता है उनका परिवार चलता है। इस बार उनके पास काम नहीं है उनके जैसे लोगों के पास काम नहीं है उनका एक ही सवाल है कि हम खाने को खुद परेशान हैं हम घोड़ों को कहां से खिलाए हम इन घोड़ों को को बेचना भी चाह रहे हैं तो कोई लेने को तैयार नहीं है। इनके जैसे न जाने कितने और परिवार होंगे जो इसी तरह की परेशानी झेल रहे होंगे क्योंकि किसी को कोई पता नहीं था कि इस तरीके का लॉक डाउन भारत में हो जाएगा।