कोटा से आए छात्रों का स्वागत वहीं दूसरी और भूख से तड़प रहे मजदूर

जब कोटा से छात्र बसों में बैठकर रवाना हुए वहीं कैंप में सामान्य वर्ग के बच्चों को भी वीआईपी सुविधा दी गई उन्हें बेहतरीन भोजन का इंतजाम किया गया साथ ही बंद बोतल पानी का भी इंतजाम किया गया लेकिन अगर दूसरी तरफ नजर डाली जाए तो हमारे देश में मजदूर जो पैदल चलकर अपने गांव पहुंच रहे हैं। और बहुत से लोग हजारों किलोमीटर का सफर पैदल तय करके अपने घर वापस पहुंच रहे हैं और कुछ मजदूर रास्ते में चलते हुए भूख से अपना दम तोड़ रहे हैं अभी एक मजदूर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई है उसमें यह पाया गया है कि मजदूर के पेट में एक भी दाना नहीं मिला और वही कोटा में फंसे छात्रों के लिए बसें भेजी जाती हैं और फिर भी वीआईपी सुविधाएं दी जाती हैं तो सवाल यह है कि मजदूरों के साथ यह अन्याय क्यों हो रहा है क्या मजदूर भारत के नागरिक नहीं।

न्यूज 18 की ख़बर के मुताबिक मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच एक जिला पड़ता है जिस जिले का नाम है आगर मालवा । इस जिले में होकर कुछ मजदूर अपने घर को लौट रहे थे और भूख प्यास से तड़प रहे थे वे पास के एक सड़क किनारे एक कैंप को देख कर रुक जाते है उस कैंप में कोटा से लौट रहे छात्रों के लिए वीवीआइपी इंतजाम था और वहीं दूसरी ओर मजदूर भूख से तड़प रहे थे। बताया जा रहा है कि यह मजदूर उन छात्रों को खाना खाते देखते रहे लेकिन इन्हें खाना नहीं मिल पाया और फिर अपने घर वापस भूखे लौटने का ही मन बना लिया। क्या सरकार को इन मजदूरों को घर लौट आने का इंतजार नहीं करना चाहिए जिस तरीके से उन छात्रों का किया है यह मजदूर भूख प्यास से दम तोड़ रहे हैं और इन्हें खाना नसीब नहीं हो रहा है

ऐसे लॉक डाउन में भारतीय गोदी मीडिया अपना नफरत जहर टीवी चैनल पर हो रही है जिसके परिणाम आज देखने को मिल रहे हैं मीडिया ने अभी तक इन मजदूरों पर कोई सवाल सरकार से नहीं किए हैं बल्कि जब भी यह अपने घर को जाने के लिए इन मजदूरों ने आवाज उठाई तब इन मजदूरों की आवाज दबा दी गई गुजरात में मजदूरों ने दो बार सड़क पर आकर धरना प्रदर्शन किया आगजनी की लेकिन अभी तक इन मजदूरों की सरकार ने सुध नहीं ली है यह मजदूर भूख प्यास से तड़प रहे हैं गुजरात कोरोनावायरस संक्रमण में दूसरे नंबर पर है पहले नंबर पर महाराष्ट्र है। इन मजदूरों के लिए किसी भी गोदी मीडिया के टीवी चैनल के एंकर ने इन मजदूरों के लिए सरकार से सवाल किया है या इन मजदूरों की आवाज उठाई है।

मजदूर अपने घर पैदल ही लौट रहे हैं और वह हजारों किलोमीटर का सफर पैदल ही तय कर रहे हैं मजदूरों के पैर में छाले पड़ रहे हैं अब तो गर्मी है सड़कें भी गर्म है और मौसम भी लगातार गर्म हो रहा है और ऐसी तेज गर्मी में अब मजदूरों का भूखे पेट पैदल चलना मुश्किल हो रहा है।