कोई भरोसा नहीं रहा मजदूरों की जिंदगी पर , ड्राइवर परिवार सहित और अन्य 20 लोग टेंपो से गांव लौट रहे थे , हो गया बड़ा हादसा

वाकई गरीब की जिंदगी का कोई मोल नहीं है और गरीब मजदूरों की जिंदगी पर कोई भरोसा भी नहीं है कि किस समय वह जिंदगी की जंग हार जाएं। कोई पता नहीं। ऐसे ही गरीब मजदूरों की औरंगाबाद रेल हादसे में जाने लगी थी जब भी पटरियों पर यह समझ कर लेट गए थे कि लॉक डाउन में रेल नहीं चल रही है और तब वह रेल की पटरियों पर आराम करने लगे और सो गए एक मालगाड़ी आती है और सब की जिंदगी छीन कर चली जाती है। रेल की पटरी पर पड़ी सूखी रोटियां बहुत कुछ बयां करती हैं।

एक टेंपो में ड्राइवर और अन्य 20 लोगों को लेकर लखनऊ की ओर जा रहा था उस टेंपो में आसपास के लोग ड्राइवर अपने परिवार सहित गांव लौट रहे थे। यह सभी लोग लखनऊ जा रहे थे और टेंपो में डीजल का खर्चा सभी लोगों ने बराबर बराबर पैसे देने का एक ग्रुप बना लिया और उस ग्रुप को इकट्ठा करके टैंपू में बैठकर लखनऊ की ओर रवाना हो गए। रास्ते में एक बार टेंपो खराब भी हुआ था जिसे ड्राइवर ने ठीक कर लिया था।

ड्राइवर ने बताया कि उसे वहां रहकर पैसों की दिक्कत होने लगी थी वह कहने लगा बिजली वाला बिल पैसे लेगा मकान मालिक भी पैसे लेगा कमाई बिल्कुल नहीं है अगर कोई हमें खाना भी देता है तो उसे पकाने के लिए इन्हें चाहिए वह हम कहां से लाएंगे और फिर इकट्ठे होकर अपने घर की ओर लखनऊ के लिए रवाना हो गए एनडीटीवी के पत्रकार सोहित मिश्रा ने इस ड्राइवर से सुबह करीब 10 बजे के वक्त बातचीत की थी देखिए सहित मिश्रा का यह ट्वीट

टेंपो में ड्राइवर की पत्नी और बच्चे आगे किस साइड में बैठे थे बाकी और मजदूर टेंपो में पीछे बैठे हुए थे सभी लोग खुशी-खुशी अपने गांव लौट रहे थे मन में खुशी थी कि वह अपने घर आराम से लौट रहे थे । ट्वीट में में देख सकते है कि किस तरीके से आराम से टेंपो में बैठकर लोग अपने गांव की ओर जा रहे हैं।

लेकिन कुछ दूर चलने के बाद हाइवे पर यह टेंपो लखनऊ की ओर जा रहा था तभी सामने से आ रही सफेद कार ने जोरदार टक्कर मार दी जिससे गाड़ी और टेंपो क्षतिग्रस्त हो गए। टेंपो कच्ची सड़क में पलट गया। जिस टेंपो ड्राइवर से एनडीटीवी के पत्रकार सोहित मिश्रा ने बात की थी उसी टेंपो ड्राइवर की इस हादसे में मृत्यु हो गई। उसकी पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। कई मजदूरों के भी काफी गंभीर चोटे आई हैं

आसपास के लोगों ने पलटे हुए टेंपो को सीधा किया। और इसी तरीके से घायल लोगों को अस्पताल तक पहुंचाया। घायलों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। लेकिन इतने बड़े हादसे पर भी गोदी मीडिया में इस खबर पर कोई जिक्र नहीं कोई चर्चा नहीं खामखा बेवजह के मुद्दों पर जोरदार चीख पुकार गोदी मीडिया के चैनलों पर चल रही है क्या गरीब की जिंदगी का कोई मोल नहीं या गरीब मजदूरों की जिंदगी का कोई भरोसा नहीं है कि किस वक्त कौन उनकी जिंदगी छीन ले।