अमीश देवगन ने अपने कार्यक्रम में चलाई थी झूठी खबर , अल्ट न्यूज ने किया खुलासा , पढ़ें पूरी खबर

अमीश देवगन हर रोज टीवी चैनल पर आर पार करते हैं और इनके आरपार में हिंदू मुस्लिम एजेंडे को टारगेट किया जाता है विपक्ष से सवाल पूछे जाते हैं सत्ता के लोगों को कंधों पर बिठाया जाता है विपक्ष की आवाज दवाई दी जाती है उन से तीखे सवाल पूछे जाते हैं मानो सरकार विपक्ष चला रहा हो। अमीश देवगन को इनके अपने ही कार्यक्रम में कई बार पुरस्कार मिल चुके हैं जिनकी वीडियो सोशल मीडिया पर देखी जा सकती है आप पुरस्कार तो समझ ही गए होंगे

1 मई को न्यूज़ 18 मीडिया सेल के आर पार शो में एक पत्रकार की खबर चलाता है उस वीडियो में मस्जिद के सामने पुलिस वालों में कहासुनी होते दिखाया गया है और उसी कहानी का जिक्र अमीश देवगन ने अपने कार्यक्रम में शामिल किया इस कार्यक्रम में अमीश देवगन ने कहा था की मस्जिद में वहां नमाज हो रही थी उसके बाद सूचना मिलने पर मस्जिद में पुलिस पहुंची पुलिस ने नमाजियों को रोकना चाहा तो उनके साथ बदसलूकी की गई देखिए यह वीडियो 33 मिनट पर अमिश देवगन ने चलायी है फ़र्ज़ी खबर

इस शो का नाम तो है आर पार इसकी अगर आप हेडिंग में ऊपर देखेंगे तो वहां लिखा हुआ होता है कि देश की सबसे बड़ी बहस आर पार। तो क्या इस आर पार में देश की सबसे बड़ी बहस कार्यक्रम है उसमें झूठी खबरें चलाई जाती है। इन्हें यह वीडियो सोशल मीडिया पर मिला होगा सोशल मीडिया पर किसी ने धार्मिक रंग देकर इस को शेयर किया होगा लेकिन इन पत्रकार ने बिना जांच किए झूठी खबर अपने कार्यक्रम में चला दी। ये देखिये वीडियो जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था

उसके बाद न्यूज़ 18 ने अपने ट्विटर हैंडल से ये ट्वीट किया

अल्ट न्यूज ने इस खबर का खुलासा किया बाद में पता चला कि जो घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था जिसे अमीश देवगन ने अपने कार्यक्रम में शामिल किया था वह घटना 29 अप्रैल की है और उस दिन बुधवार का दिन था। मुंबई पुलिस द्वारा दी गई प्रेस रिलीज पत्र में 2 मई 2020 की तारीख पड़ी हुई है लेकिन घटना 29 अप्रैल की है।

प्रेस नोट में साफ-साफ लिखा गया है कि सब इस्पेक्टर का काका साहब नगवे और उनके साथी कुर्ला पाइप रोड पर ड्यूटी कर रहे थे। ड्यूटी के वक्त एक व्यक्ति पुलिसकर्मियों को गाली देना शुरू कर देता है जिसका नाम रिजवान मेमन उर्फ रिजवान टुंडा है। पुलिस कर्मियों से कहा था कि इलाके की सारी दुकानें बंद कर दी जाएं। रिजवान यह भी दावा कर रहा था कि वह एनआईए में काम करता है। और उसने इसी का सहारा लेते हुए पुलिसकर्मियों को धमकाया। रिजवान की नोकझोंक होने लगी मामला बढ़ता देख भीड़ इकट्ठा होने लगी इसके बाद रिजवान वहां से भाग निकला। जिस दिन रिजवान की पुलिस से झड़प हुई उस दिन 29 अप्रैल थी यानी बुधवार का दिन था उस दिन शुक्रवार नहीं था जो कि शुक्रवार की नमाज का वीडियो बताकर अमीश देवगन अपने कार्यक्रम में चला रहे हैं। और इस वीडियो का शुक्रवार की नमाज से कोई लेना देना नहीं है। तो बताइये मित्रो इस पत्रकार पर झूठ फैलाने के आरोप में कही होनी चाहिए कि नहीं चाहिए