अब इस पत्रकार को ग्रीन जोन हरे रंग से होने लगी आपत्ति , ट्विटर पर जताया दुख , पढ़ें यह रिपोर्ट

सुदर्शन न्यूज़ पर एक एंकर हैं जो हमेशा हिंदू मुस्लिम का एजेंडा चलाते हैं अगर आप इनके प्राइम टाइम कार्यक्रम क्यों देखेंगे तो हर रोज वही हिंदू मुस्लिम के सोच होते हैं सोशल मीडिया पर झूठी तैरती हुई खबरों पर यह एंकर कार्यक्रम करता है। और इस एंकर का बस एक ही टारगेट है कि किसी भी तरीके से मुस्लिमों को टारगेट करो विपक्ष को टारगेट करो और अगर देश में कोई मामला हो जाए तो सत्ता से सवाल करने की बजाय विपक्ष से सवाल करो मुस्लिमों को टारगेट करो इसका रोज का धंधा है। पालघर में साधुओं की घटना सामने आई थी तब इसी पत्रकार ने सोशल मीडिया पर तैरते हुए फुटेज में एक काल्पनिक नाम शोएब एक कार्यक्रम कर डाला जिसका हम खुलासा पहले अपने आर्टिकल में कर चुके हैं। इससे पहले इस पत्रकार ने पालघर मामले पर कांग्रेस को कोसना शुरू कर दिया था।

जब पालघर में साधुओं की घटना हुई थी तब इस पत्रकार ने अपनी डीपी पर एक फोटो लगाया था जिस फोटो में लिखा था जस्टिस फॉर साधु। सोचने वाली बात यह है कि जब बुलंदशहर में साधुओं के साथ घटना होती है तभी इस एंकर का सांप सूंघ जाता है हमारी टीम ने शाम को 8 बजे इनके कार्यक्रम को देखना चाहा। तो हमने सोचा कि वाकई यह साधुओं के लिए आवाज उठाते होंगे लेकिन उसमें बुलंदशहर का कहीं जिक्र भी नहीं था। था क्योंकि वहां भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और उत्तर प्रदेश का मिला है और वहां के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नहीं बनता है हां अगर कोई विपक्ष की सरकार होती तो सवाल जरूर पूछा जाता।

चलो वो सब छोड़िए लोगों का तो रोज का है। लेकिन आज ही पत्रकार कहता है कि जो कोरोनावायरस प्रभावित जोन बनाए गए हैं उसमें मुझे हरे रंग से आपत्ति है रेड नहीं ग्रीन कहा जाए और जहां कोरोनावायरस के मामले बिल्कुल नहीं है वहां नारंगी जोनमाना जाए। सबसे पहले एक सवाल यहां बनता है कि यह पत्रकार है या कोई धर्म का ठेकेदार। इसके घर पर आएगा सब्जी भी बनती होगी हरे रंग की होती है तो क्या उससे भी आपत्ति जताता होगा या उसे नारंगी सब्जी मानता होगा या फलों में सिर्फ संतरा ही खाता होगा। इस तरीके के बेहूदा सवाल करने वाला एक व्यक्ति पत्रकार नहीं हो सकता।

अभी कुछ दिनों पहले एक सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होता है जिसमें एक व्यक्ति क्वॉरेंटाइन सेंटर में खाने को लेकर चिल्लाता है मुझे कहता है कि मुझे दाल खिला रहे हो मेरे जबड़े में दुखन हो रही है। सबसे पहले उस व्यक्ति को यह सोचना चाहिए कि भारत में क्वॉरेंटाइन सेंटरों का हाल क्या है। लेकिन इस वीडियो पर इस पत्रकार की भाषा देखिए हम एक बार फिर कह रहे हैं कि यह आदमी पत्रकार नहीं हो सकता पत्रकार के नाम पर धोखा है।